Monday, September 6, 2010

वोमिटिंग करना है तो देखिये फिल्म 'हेल्लो डार्लिंग'


यह एक ऐतिहासिक फिल्म थी मेरी जिंदगी के लिए...निकृष्ट फिल्म बनाने की कला का सर्वोत्कृष्ट उदहारण...दर्शको को बोर करने की पराकाष्टा....पैसे को अगर नाली में फेक देते तो भी एक सार्थक काम होता. शायद... किसी को मिल जाये और वो उसके काम आ जाये...पर इस फिल्म को देखने में खर्च किये पैसे के लिए मै अपने आप को कभी माफ़ नहीं करूँगा. इससे पहले भी एक फिल्म आई थी - कमल हसन की 'दशावतार'. ऐसे महान फिल्म निर्माताओ और मूर्घन्य पटकथाकारो से मेरा विनम्र निवेदन है की कृपया आप ऐसे फिल्म बनाने के पीछे अपनी अद्भुत मंशा को जगजाहिर करे. हेल्लो डार्लिंग की बात करे तो फिल्म किस विषय पर था...उस सत्य का छिद्रान्वेषण तो शायद मशहूर जासूशी कथा लेखक अर्थेर कानन डायल भी नहीं बता सकते. दिलकश अदाकारा ईशा कोप्पिकर की अचंभित करने वाले डाएलोग डेलिवरी का तो मै कायल हो गया ! किसी को भी आकर्षित कर सकने वाले खुबसूरत सुडौल बॉडी पर अत्याधुनिक वस्त्रो को धारण किये ये अप्सरा ठेठ हरयाणवी बोलती है ...सुना आपने ? हरयाणवी ! शायद आपको हाजमोला की जरुरत हो. सेलिना जेटली और गुलपनाग के बारे में कुछ नहीं कहूँगा क्योंकि फिल्म में उनके साथ उनका बॉस शोषण करता है पर मुझे तो ये वास्तविक घटना लगाती है. गुल पनाग ने इस फिल्म को क्यों चुना मुझे समझ में नहीं आया. यह फिल्म उसके करियर के लिए एक दाग है. गुलपनाग की फिल्म देखि थी - धुप. क्या मस्त फिल्म थी और लाजवाब एक्टिंग अपर इस फिल्म में उसके साथ इन्साफ नहीं हुआ. अगर जावेद जाफरी जिन्हें अब हीरो बनने
का शौक चढ़ा है...कही मिल जाए तो फिर यह जरुर शाबित कर दूंगा की 'इंसान भी कभी जानवर था ' ऐसे मानसिक शोषण करने वाले फिल्म निर्माताओ को बॉलीवुड से बहिस्कृत कर देना चाहिए.

1 comment:

  1. first of all congrates for this blog writing and any ways thanks for giving information abt this falatu ka film bachha liya future me mood kharab karane se

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