Thursday, October 25, 2012


मै हिंदुस्तान हु !
चंद सवालो की जकडन में लगता एक गुलाम हूँ  
आज भी है आजादी की इक्षा 
और कहते है मै महान हु !!
मै हिंदुस्तान हु 

 गौरव की है बात 
देकर दुनिया को सभ्यता की सौगात 
खड़ा हु विश्वमंच पर सारे पिछडो के साथ 
मेरे ज्ञान के बलबूते दुनिया चाँद को छूने जाती है 
आज भी मेरे आंगन में बेटियाँ खरीदी जलाई जाती है 
मैं हिंदुस्तान हु 

गंगा यमुना कृष्णा कावेरी 
नदिया कलकल बहती है 
ह्रदय विदारक मौन दृश्य 
नन्हे  भरत प्यास से मरते है 

अति समृद्ध सशक्तों में थे मेरे वीर शुमार 
शील वीर ने अन्य राष्ट्र पर कभी नहीं किया प्रहार
वीर नहीं नपुंशक हो गर कर जाओ बर्दाश्त 
मेरे हर अंगो पर होता बारम्बार आघात ! बारम्बार अघात ! 
मै हिंदुस्तान हु 

गिनती सिखलाई दुनिया को दिया दशमलव शुन्य का ज्ञान 
मै पीछे ही खड़ा रहा और बाकी बढ़ गए सीना तान 

डॉक्टर इंजिनीअर वैज्ञानिक की फ़ौज बना डाली है 
पर गाँव जहा मै रहता हु वह का ढांचा खाली है  ! 
 
शल्य, योग, आयुर्वेद से विश्व स्वस्थ्य को पता है 
विश्वगुरु के शिशु आज, गैरों की मदद को तरसता हैं 
मै हिंदुस्तान हु !

गर्व करते हो अपने पर हिन्दुस्तानी कहलाते हो 
अपना घर अपना ही वतन त्याग  क्यों कहीं और चले जाते हो ?
उर्वर माटी झील समुन्दर किसकी कमी तुम पाते हो ?
बनके दीपक मुझको त्यज कही और प्रकाश फैलाते हो !

कहते है शीघ्र ही बनूँगा मै सुपरपावर 
कहने वालो तुम पर धिक्कार है !
पैसठ बसंत तो बीत गए 
अब कितना इन्तेजार है ? 

मै हिंदुस्तान हु ! 

©  आदित्य श्रीवास्तव