Tuesday, January 22, 2013



वात्सल्य धर्म से ग्रषित हर माँ 
करती है पुष्ट शिशु की कामना 
आकांक्षा कहे कर्त्तव्य कहे 
दोनों में एक समानता 
गूंजे घर में किलकारी
झूले  आँगन में पालना 
वात्सल्य धर्म से ग्रषित हर माँ 
करती है पुष्ट शिशु की कामना 

माँ का एक विचित्र  रूप 
मैंने देखा पहली बार 
फूटपाथ पर अपंग शिशु सह 
दाता का इंतजार 
हाथ थे टेढ़े 
पाँव अपूर्ण 
प्रकृति का क्रूर प्रहार 
ममता की देवी हाथ फैलाये 
शिशु का निरंतर विलाप 
फटे वस्त्र में लज्जा छुपाये 
याचना बारम्बार 
सभ्य समाज में  क्षुदा तृप्ति
और जीवन का आधार 
महल में  शिशु का भूख में क्रंदन 
करता वात्सल्य अस्तित्व में कम्पन  
फुटपाथ पर 
शिशु का पीड़ा रोदन 
अद्भुत ! माँ का उत्साहवर्धन 
कलियुग है ये  कलियुग है 
माता इसमें तेरा क्या दोष 
पुत्र कर रहा अपने धर्मं का पालन 
कर ले तू संतोष 
- आदित्य कुमार श्रीवास्तव (22/1/13)