Wednesday, April 22, 2015

पाकीज़ा की दीगर शख्सियत

जिंदगी से बेज़ारी, दर्द से मोहब्बत, घुटन भरे अल्फाज, नाजुक अंदाज! ट्रैजिक क्वीन मीना कुमारी उर्फ़ महजबीं बानो की शख्सियत को ऐसे स्टीरिओटाइप चंद लाइनो में ही नहीं समेटा जा सकता। ये हकीकत है की उनके कंपकपाते होठो पर तैरती मुस्कान के पीछे रहस्यमयी दर्द भरी कहानियाँ है पर मीना कुमारी का व्यक्तित्व कुछ और भी है. मीना जी को कहानियां सुनने का बड़ा शौक था परियों की, दूर देश के राजा की. एक बार तो इन्होने ये कह दिया की इन्हे मौत बहुत पसंद है क्योंकि मौत की चुप्पी हर बीतते लम्हे में एक दिलचस्प कहानी सुनाया करती है. इन्हे बासी रोटी बहुत पसंद थी, नहीं मिलने पर रोने लग जाती थीं. डायरी लिखने का ऐसा शौक की पर्स में हमेशा डायरी रखती, कहतीं "कोई बात जेहन में आ जाती है तो उसको डायरी में कह देती हूँ बाद में सोच के लिखूंगी तो उस में बनावट आ जायेगी। जो मैं एक्टिंग करती हूँ वह ख्याल किसी और का है स्क्रिप्ट किसी और कि और डायरेक्शन किसी और का. इस में मेरा अपना कुछ भी नही. दरअसल मैं तो वो हूँ जो इस डायरी में लिखा है" गुलजार साहब ने मीना जी के लिए ये पंक्तियाँ लिखी "शहतूत की डाल पर बैठी मीना बुनती रेशम के धागे .. रेशम की यह कैदी शायद एक दिन अपने ही धागों में घुट कर मर जायेगी" और ऐसा हुआ भी ! दुनिया को अलविदा कहने से पहले मीना कुमारी ने अपनी डायरी कमाल अमरोही या धर्मेन्द्र को नहीं बल्कि गुलजार को गिफ्ट कर दी. गुलजार को ही क्यों ? जाते जाते भी लीजेंडरी एक्ट्रेस इक रहस्य छोड़ गयीं.

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